Monday, February 4, 2019

कृष्णांश दर्शन ( Preface)


कृष्णांश दर्शन

अपने गुरूजी द्वारा दिखाए मार्ग संभव पर चलकर संभव हुए दर्शन कृष्णांश के. मणिदेवकी के कृष्णांश भगवान हैं कलियुग के महावतार—महाविष्णु साक्षात इस धरा को सनातन पथ की ओर अग्रसर करने हेतु पधारे और जाने गए कृष्णांश भगवान.
भगवान से मिलन संभव तभी जब अपनी मन की आँखों को निष्छलता के जल द्वारा निर्मल किया जाये. दर्शन भगवान के कोई कोई विरला ही कर पाता है. इस घोर कलियुग में कृष्णांश से मिलना न केवल संभव, बल्कि सरल भी बनाया स्वयं भगवान ने.
केदारनाथ से सफाई अभियान २०१३, जून में प्रारम्भ करवा कृष्णांश विलुप्त तो अवश्य हुए लेकिन अदृश्य कभी नहीं. इन आँखों को कृष्णांश के दर्शन सुलभ नहीं, लेकिन जाते हुए वे दे गए मानवता को एक ऐसा अस्त्र जिसे चलाकर स्वयं को योग्य बनाना संभव है.
कृष्णांश के दर्शन की पिपासा यदि मन में है, समझें – यही इशारा है प्रकृति का, यही सन्देश है माँ भारती, पृथ्वी यानि भामणि का, कि उठो! अब और देर ना करो पुत्रों और पुत्रियों. अपने भगवान् से मिलो, स्वयं को निष्छल करके दर्शन करो कृष्णांश के.
              “ कृष्णांश बसे मेरे दिल में
                कृष्ण बसे मेरी नाभि में,
                राम बसे मेरे रोम रोम
                कृष्णेद्र बसे सब जोड़ जोड़ “

अश्वनीजी तत्वज्योतिष द्वारा लिखित इन 4 पंक्तियों के माध्यम से जीवन का दर्शन समझा जा सकता है.

5 तत्वों का पुतला ये प्राणी, सिर्फ शरीर, बुद्धि या मन ही नहीं है, बल्कि ह्रदय है, जो कि प्रतिक्षण भगवान के होने का आभास करवाता है धड़कन द्वारा. इसी ह्रदय स्पंदन से न केवल यह शरीर कार्य करने के लिए उर्जा पाता है, बल्कि मन में विचार भी आता है (पूर्व एकत्रित कर्मफलो अनुसार)
Ref: अग्रसेन वंशज गीत:

कृष्णांश का वास ह्रदय में है, यानि अपने कृष्णांश तत्व को जागृत करके दर्शन करना संभव होने लगता है. कृष्णांश तत्व जागृत कैसे हो, क्या हैं भगवान् के दर्शन के नियम, यही बताने के लिए इस पुस्तक की रचना कर रही हूँ .

मणिदेवकी



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