Friday, February 8, 2019

महिला सशक्तिकरण, क्या मात्र एक परिकल्पना?

महिला सशक्तिकरण, क्या मात्र एक परिकल्पना?
महिला सशक्तिकरण तभी संभव है जब महिलाओं को मुक्ति मिले अपनी सभी प्रकार की शारीरिक समस्याओं से। मात्र बीमारी का इलाज उपलब्ध कराने की बजाय मुख्य बिंदु होना चाहिए अपनी सेहत की देखभाल करना सिखाने पर। साफ सफाई के साथ ही महिलाओं के लिए जरूरी है अपनी मानसिक सेहत ठीक रखने के लिए, अपने शरीर में समय समय पर होने वाले बदलावों को समझकर, किसी भी बीमारी को आने से रोकना।
लेकिन हमारे समाज की विडंबना रही है, महिलाओ की सेहत के बारे में बात भी करना वर्जित रहा है, ऐसे में महिला सशक्तिकरण मात्र एक स्वप्न जैसा ही लगता है।
परंतु अब स्थिति में बेहतरी आयी है, और एक जागरूकता जन जन तक पहुंची है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होनी ही चाहिए। अब भी दिशाज्ञान न होने के कारण, सेहत महिला की और उसके परिवार की गिरती ही जा रही है।
इसी स्थिति में सुधार के लिए देवात्मा समाज की सेक्रेटरी मणिदेवकी निधि अग्रवाल ने मुहिम चलाई है, जिसके तहत महिलाओं को सिखाया जाता है, की 6 वर्ष की उम्र से ही अपने आंतरिक अंगों को स्वस्थ, सुदृढ़ कैसे रखा जाए, जिससे महिला प्रसन्नचित मन से अपने परिवार की देखभाल कर पाए, अपना आत्मसम्मान बरकरार रखते हुए।
निष्ठायोग एक ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित की गई है ETPO नामक संस्था द्वारा, जिसके द्वारा विधिवत प्रैक्टिस करने से, महिलाये अपनी सभी समस्याओं से समय रहते निजात पा सकती हैं, और मात्र 20 मिनट प्रतिदिन लगाकर स्वयं पर, एक सेहतमंद जीवन और सुखी परिवार की प्राप्ति पूर्णतः संभव होने लगती है।
आवश्यकता है, निष्ठायोग का प्रचार प्रसार सरकार द्वारा किया जाए, स्कूली शिक्षा में निष्ठायोग को अनिवार्य किया जाय, और हम अपनी आने वाली पीढ़ी के सभी प्रकार से स्वास्थ्य की न सिर्फ कामना करें, बल्कि सुनिश्चित करे।
स्वस्थ दाम्पत्य जो कि समाज की नींव है, वह भी तभी संभव है जब महिला अपने जीवन को पीड़ा सहने के लिए अभिशप्त ना माने, माँ को भी यह सिखाया जाना चाहिए कि बढ़ती उम्र की बेटी की देखभाल कैसे करनी है, जिससे मासिक पीड़ा और इंफेर्टिलिटी जैसी परेशानियां बेटी को न देखनी पड़े।
भारतीय संस्कृति की एम्बेडेड टेक्नोलॉजी(BSkiET) के तहत चलाये जाने वाले सभी प्रोग्राम तलाक जैसे कीटाणु को हमारे समाज से पूर्णतया हटाने के लिए हैं, जो कि तभी हो सकता है, जब माँ अपने गुरुपद को समझे और संभाले, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के साथ। जय हिंद।

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