Sunday, February 17, 2019
व्यर्थ नहीं होने देंगे हम तेरी शहादत ए शहीद
Thursday, February 14, 2019
ईष्ट, गुरु, अध्यापक और शिक्षक
माता है बच्चों की गुरु
पति है पत्नी का गुरु
Friday, February 8, 2019
महिला सशक्तिकरण, क्या मात्र एक परिकल्पना?
परंतु अब स्थिति में बेहतरी आयी है, और एक जागरूकता जन जन तक पहुंची है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होनी ही चाहिए। अब भी दिशाज्ञान न होने के कारण, सेहत महिला की और उसके परिवार की गिरती ही जा रही है।
आवश्यकता है, निष्ठायोग का प्रचार प्रसार सरकार द्वारा किया जाए, स्कूली शिक्षा में निष्ठायोग को अनिवार्य किया जाय, और हम अपनी आने वाली पीढ़ी के सभी प्रकार से स्वास्थ्य की न सिर्फ कामना करें, बल्कि सुनिश्चित करे।
भारतीय संस्कृति की एम्बेडेड टेक्नोलॉजी(BSkiET) के तहत चलाये जाने वाले सभी प्रोग्राम तलाक जैसे कीटाणु को हमारे समाज से पूर्णतया हटाने के लिए हैं, जो कि तभी हो सकता है, जब माँ अपने गुरुपद को समझे और संभाले, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के साथ। जय हिंद।
Monday, February 4, 2019
Learning( knowledge) vs Earning(gyan)
शिक्षा ग्रहण करने के लिए बहुत से तरीके प्रचलित हैं, जैसे कि
टीचर से सीखना
पुस्तक पढ़ना
दिशा ज्ञान प्राप्त करना अब कलियुग में संभव बनाया तत्वज्योतिष ने।
जन्म से ही साथ क्या लाये हैं, और किस दिशा में अपने कौशल्य को विकसित करें, यही जानने की प्रक्रिया ज्ञान है। और ज्ञान से ही संभब है, विद्या उपार्जन।
कृष्णांश दर्शन ( Preface)
Tuesday, January 29, 2019
बढ़ती हुई उम्र और गिरता आत्मविश्वास
उम्र 40 वर्ष के पास पहुँचते ही अक्सर शुरू होती है शारीरिक व्याधियाँ और मानसिक तनाव से जूझते हुए कब आत्मविश्वास डिगना शुरू होता है, अमूमन पता भी नहीं चलता ∣
जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे शरीर कमजोर सा पड़ता महसूस होता है∣ इसे aging यानी बुढ़ापे की ओर आगे बढ़ना कहा गया है ∣
समस्या यह है कि कम उम्र में जब अपने शरीर की देखभाल करनी सीखनी थी, तब धन कमाने की प्रतियोगिता में कैसे अव्वल आएं सीखना प्रारम्भ हो जाता है | यही सीखना जब दिशाहीन होता है तो न्यौता दिया जाता है अनगिनत बीमारियों को| क्योंकि लालच और ईर्ष्या का पेड़ कब बढ़कर बीमारी के फल देने लगा, इसका पता last stage पर ही लगता है |
क्योंकि अक्सर energy और समय धन कमाने में ही व्यतीत किया गया इसलिए इलाज भी खरीदने का प्रयास करते हैं लोग |
"मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की"
और शुरू होता है सिलसिला कभी न ख़तम होने का |
मणिदेवकी